आलसी लोग कारणजन्मा होते हैं।
आलस्य महिमा आलस्य प्राचीन काल से ही अस्तित्व में है। न्यूज़ीलैंड के प्रसिद्ध वैज्ञानिक बिभा नुप्र सादू ने वर्षों के शोध के बाद बताया कि डायनासोर इसलिए विलुप्त हो गए क्योंकि उन्होंने आलस्य छोड़कर अधिक सक्रिय जीवन अपनाया। सदैव ध्यानमग्न रहने वाले भगवान सदाशिव के तेज में स्थित परम आनंद का ही एक अंश यह आलस्य है, ऐसा प्रसिद्ध प्रवचनकार, तत्त्वचिंतक श्री श्री श्री रापोलु श्रीकांताचार्य ने कहा। योगशास्त्र में “आलस्यासन” का उल्लेख प्राचीन काल से ही मिलता है। जिस प्रकार शवासन में शरीर को पूर्ण विश्राम मिलता है, उसी प्रकार आलस्यासन में शरीर और मन दोनों को संपूर्ण विश्राम प्राप्त होता है। इससे शरीर के सभी अंग अधिक समय तक स्वस्थ और टिकाऊ बने रहते हैं, ऐसा प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ श्री रंगा साई ने बताया। विश्व के सभी लोगों को अपने दैनिक जीवन में आलस्य को एक अभिन्न अंग बनाना चाहिए। इससे समाज के कल्याण में अत्यंत बड़ा योगदान मिलेगा। सभी आलसी लोग एक मंच पर आकर आलस्य के लाभों का व्यापक प्रचार करें और लोगों में जागरूकता फैलाएँ, ऐसा संकल्प लेने वाले प्रसिद्ध समाजसेवी आलस्यब्रह्म श्री ज्ञानेश्व...